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यूथ कांग्रेस के चुनाव ने कांग्रेस के आंतरिक कलह और सिरफुटौव्वल को चौराहे पर ला दिया है : राहुल टिकरिहा

भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष ने कहा : पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का बयान कांग्रेस की अंतर्कलह और संगठनात्मक पतन की खुली स्वीकारोक्ति “जो पार्टी अपने युवा संगठन को एकजुट नहीं रख सकती, वह युवाओं का नेतृत्व करने का दावा कैसे कर सकती है?” रायपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा ने कांग्रेस के…

भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष ने कहा : पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का बयान कांग्रेस की अंतर्कलह और संगठनात्मक पतन की खुली स्वीकारोक्ति

“जो पार्टी अपने युवा संगठन को एकजुट नहीं रख सकती, वह युवाओं का नेतृत्व करने का दावा कैसे कर सकती है?”

रायपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत के युवक कांग्रेस के चुनावों को लेकर बयान पर कड़ा कटाक्ष करते हुए कहा है कि यूथ कांग्रेस के तथाकथित आंतरिक चुनाव ने पार्टी की संगठनात्मक दुर्गति, गुटबाजी और बिखराव की पोल खोलकर रख दी है। युवा कांग्रेस चुनाव में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के बेटे ने भी नामांकन दाखिल किया था लेकिन आयु अधिक होने की वजह से उनका नामांकन रद्द हो गया था कहीं इसी के चलते अमरजीत भगत खीज निकालने के लिए तो नहीं बोल रहे हैं। श्री टिकरिहा ने कहा कि कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता खुद यह स्वीकार कर रहे हैं कि यूथ कांग्रेस चुनावों के कारण पार्टी में खेमेबाजी, सिरफुटौव्वल और खुलेआम आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।

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भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्री टिकरिहा ने कहा कि पूर्व मंत्री अमरजीत भगत का यह कहना कि ‘चुनाव बंद होने चाहिए क्योंकि इससे पार्टी मजबूत होने के बजाय अंदर से कमजोर हो रही है’, यह साबित करता है कि कांग्रेस अब नेतृत्वविहीन और अंतर्कलह से ग्रस्त संगठन बनकर रह गई है। कांग्रेस के नेता खुद मान रहे हैं कि यह गुटबाजी और आपसी रंजिश सिर्फ बड़े नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदान केंद्र और गाँव स्तर तक पहुँच चुकी है। जब एक ही पार्टी के युवा कार्यकर्ता पदों की लालसा में सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे की पगड़ी उछाल रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के पास न तो कोई नीति बची है और न ही कोई अनुशासन। श्री टिकरिहा ने कहा कि कांग्रेस का लोकतंत्र का दिखावा पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। चुनाव के नाम पर कार्यकर्ताओं में फूट डालकर उन्हें आपस में लड़ाने वाली कांग्रेस आज खुद अपने ही आंतरिक विरोध के बोझ तले दब रही है। जो दल अपने युवा संगठन के चंद पदाधिकारियों का चयन शांतिपूर्ण तरीके से नहीं कर सकता, वह छत्तीसगढ़ के युवाओं के भविष्य और विकास की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रखता।

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