
बिलासपुर/ मुंगेली । बिलासपुर रेंज में अपराधों पर शिकंजा कसने और पुलिस की जांच प्रक्रिया को और तेज करने के लिए बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया गया है। पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने रेंज के सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों के साथ अपराध एवं सुरक्षा समीक्षा बैठक में लंबित मामलों के त्वरित निराकरण, NDPS मामलों में वित्तीय जांच, गो-तस्करी गिरोहों पर कार्रवाई और डिजिटल पुलिसिंग को लेकर सख्त निर्देश दिए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन से लेकर CCTNS, ई-साक्ष्य, ई-फॉरेंसिक और ई-मालखाना जैसे डिजिटल सिस्टम के इस्तेमाल की भी समीक्षा की गई।
60 और 90 दिन की समय-सीमा में चालान या खात्मा
बैठक में पुलिस थानों की पेंडेंसी कम करने पर विशेष जोर दिया गया। पुराने मामलों के जल्द निराकरण के निर्देश देते हुए BNSS के तहत 60 और 90 दिनों की वैधानिक समय-सीमा के भीतर चालान या खात्मा रिपोर्ट दाखिल करने का लक्ष्य तय किया गया है।
सभी राजपत्रित अधिकारियों को इसकी साप्ताहिक मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी दी गई है। पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट किया गया है कि जांच और चालान की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
CCTNS से लेकर ई-साक्ष्य तक 100% डिजिटल इस्तेमाल पर जोर
पुलिसिंग में तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। CCTNS और अन्य IT पोर्टल्स के शत-प्रतिशत उपयोग पर जोर दिया गया।
पुलिस को विशेष रूप से इन डिजिटल व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए गए—
e-Sakshya: डिजिटल साक्ष्यों को पोर्टल से जोड़ना।
e-Forensic: जब्त सामग्री को फॉरेंसिक जांच के लिए डिजिटल प्रक्रिया के जरिए भेजना।
e-Malkhana: जब्त माल का पारदर्शी और बारकोड आधारित रिकॉर्ड रखना।
MedLEaPR: डिजिटल MLR और PMR रिपोर्ट को बढ़ावा देना।
e-Sign: विवेचकों और शिकायतकर्ताओं के डिजिटल हस्ताक्षर की व्यवस्था।
CCTNS: IIF-1 से IIF-11 तक के रिकॉर्ड को अपडेट रखना।
VCNB: ग्राम अपराध नोटबुक की प्रविष्टियों को राजस्व रिकॉर्ड के अनुरूप अपडेट करना।
नशा तस्करों पर सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति तक पहुंचेगी जांच

NDPS मामलों को लेकर आईजी ने पुलिस को और प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मादक पदार्थों की जब्ती के दौरान प्रक्रियात्मक गलतियों को रोकने के लिए एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के प्रभारी या प्रशिक्षित अधिकारी की मौजूदगी में कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
नशीले पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल वाहनों की सक्षम मजिस्ट्रेट के सामने पेशी और फोटोग्राफी सहित संयुक्त इन्वेंट्री तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही आदतन तस्करों की अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई की दिशा में कदम उठाने को कहा गया है। PIT-NDPS और SAFEMA के तहत संपत्ति कुर्की के ठोस प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
गो-तस्करी गिरोहों पर ‘एंड-टू-एंड’ जांच
गो-तस्करी के मामलों में केवल वाहन या आरोपियों तक कार्रवाई सीमित नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस को अंतरराज्यीय गिरोहों के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच करने को कहा गया है।
इसमें तस्करी के पूरे नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और जुड़े लोगों की भूमिका की जांच पर जोर रहेगा।
आदतन तस्करों की गैंग हिस्ट्रीशीट खोलने, संपत्ति अटैच करने तथा जब्त वाहनों के त्वरित राजसात और सार्वजनिक नीलामी के लिए कलेक्टर कोर्ट से समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीमा से लगे रास्तों पर 24 घंटे चेकिंग
अंतरराज्यीय सीमाओं से जुड़े मार्गों पर 24 घंटे सघन चेकिंग करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य गो-तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाना है।
लापरवाही पर तय होगी सीधे जिम्मेदारी
आईजी रामगोपाल गर्ग ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून व्यवस्था, डिजिटल पोर्टल्स के इस्तेमाल और अपराध नियंत्रण में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
CCTNS और IT पोर्टल्स के अनुपालन में लापरवाही, विवेचना में गंभीर त्रुटियों के कारण आरोपियों के दोषमुक्त होने और चालान प्रस्तुत करने की निर्धारित समय-सीमा का उल्लंघन होने पर संबंधित अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।
लापरवाही मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
इन जिलों के पुलिस अधिकारी रहे बैठक में शामिल
बैठक में बिलासपुर, रायगढ़, मुंगेली, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती, जांजगीर-चांपा और सारंगढ़ जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए। इसके अलावा बिलासपुर रेंज कार्यालय के अधिकारी, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स और संबंधित नोडल अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
क्या है इस बैठक का सबसे बड़ा संदेश?
बिलासपुर रेंज पुलिस अब अपराध नियंत्रण के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्य, समयबद्ध जांच, वित्तीय विवेचना और अपराधियों की संपत्ति तक पहुंचने की रणनीति पर जोर दे रही है। खासतौर पर NDPS और गो-तस्करी के मामलों में पूरे नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।