लगरा,खपरीकलां और चिल्फी क्षेत्र में सड़कों पर सैकड़ों मवेशियों का जमावड़ा; किसानों को पूरी रात करनी पड़ रही खेतों की रखवाली, कांजी हाउस चालू करने की मांग
मुंगेली/लोरमी । खपरीकलां-लोरमी तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम लगरा, खपरीकलां और चिल्फी क्षेत्र के बड़े पुल इन दिनों आवारा मवेशियों की समस्या से जूझ रहे हैं। पुलो और सड़क मार्गों पर सैकड़ों की संख्या में मवेशियों के बैठने और घूमने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को उठानी पड़ रही है। सड़क और पुल पर अचानक मवेशियों के आने से दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार दिन के समय बड़ी संख्या में मवेशी पुलों पर ही डेरा जमाए रहते हैं। वाहनों के आने-जाने के दौरान उन्हें हटाना भी मुश्किल होता है। कई बार मवेशी सड़क के बीचोंबीच बैठ जाते हैं, जिससे वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है। रात के समय यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब यही आवारा मवेशी आसपास के खेतों में पहुंचकर धान की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
दिन पुल पर डेरा, रात में खेतों में पहुंच रहे मवेशी
किसानों का कहना है कि इस समय खेतों में धान की फसल लहलहा रही है। फसल को तैयार करने में किसानों ने महीनों मेहनत की है, लेकिन आवारा मवेशियों के झुंड रात में खेतों में घुसकर फसल को रौंदने और खाने का काम कर रहे हैं।
फसल को बचाने के लिए किसानों को रात-रातभर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि दिनभर खेती-किसानी का काम करने के बाद भी रात में खेतों की निगरानी करना उनकी मजबूरी बन गई है। यदि समय रहते आवारा मवेशियों की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो किसानों को फसल में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
निराश्रित मवेशी बन रहे ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या
ग्रामीणों ने बताया कि गांवों में कई पशुपालक अपने मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं। पशुओं की देखरेख नहीं होने के कारण वे निराश्रित होकर इधर-उधर घूमते रहते हैं। भोजन और आश्रय की तलाश में मवेशी कभी सड़कों तो कभी खेतों में पहुंच जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले गांवों में आवारा एवं निराश्रित मवेशियों को रखने के लिए कांजी हाउस की व्यवस्था हुआ करती थी। इससे खुले में घूमने वाले पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था होती थी। लेकिन वर्तमान में कई स्थानों पर कांजी हाउस बंद पड़े हैं, जिसके कारण समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।
किसानों के सामने फसल बचाने की चुनौती
धान की फसल के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी फसल को आवारा मवेशियों से बचाने की है। ग्रामीणों के मुताबिक खेतों के आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण मवेशियों के झुंड आसानी से खेतों में प्रवेश कर जाते हैं।
किसानों को खेतों की रखवाली के लिए रात में जागना पड़ रहा है। कई किसान बारी-बारी से खेतों की निगरानी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा मवेशियों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है।
अशोक चंद्राकर ने उठाई कांजी हाउस शुरू करने की मांग
इस मामले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी मुंगेली के महामंत्री अशोक चंद्राकर ने शासन-प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निराश्रित मवेशियों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। पुलों और सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े से जहां आम लोगों को परेशानी हो रही है, वहीं रात में खेतों में घुसकर मवेशी किसानों की मेहनत को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अशोक चंद्राकर ने कहा कि प्रशासन को इस समस्या को केवल आवारा पशुओं की समस्या के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि यह किसानों की आजीविका और सड़क सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर विषय है। पुलों पर बैठे मवेशियों के कारण कभी भी बड़ा सड़क हादसा हो सकता है। वहीं धान की फसल को नुकसान होने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि क्षेत्र में बंद पड़े कांजी हाउसों को तत्काल प्रारंभ किया जाए। इसके साथ ही सड़कों और पुलों पर घूम रहे निराश्रित मवेशियों को पकड़कर कांजी हाउस में रखने की नियमित व्यवस्था की जाए।
पुलों से मवेशियों को हटाने की भी मांग
ग्रामीणों ने लगरा, खपरीकलां और चिल्फी क्षेत्र के प्रमुख पुलों पर नियमित निगरानी और मवेशियों को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल आने-जाने वाले बच्चों और राहगीरों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। सुबह और शाम के समय यातायात बढ़ने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित विभागों की टीम गठित कर क्षेत्र में अभियान चलाया जाए और सड़कों तथा पुलों पर बैठे मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए।
कांजी हाउस शुरू होने से दोहरी समस्या का होगा समाधान
ग्रामीणों का मानना है कि यदि बंद पड़े कांजी हाउसों को दोबारा शुरू कर दिया जाए तो इससे किसानों और राहगीरों दोनों को राहत मिल सकती है। निराश्रित मवेशियों को सुरक्षित स्थान मिलने से जहां सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा, वहीं खेतों में फसल नुकसान की समस्या पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
अब ग्रामीणों और किसानों की नजर शासन-प्रशासन की कार्रवाई पर है। क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आवारा मवेशियों की समस्या को देखते हुए किसानों ने जल्द से जल्द कांजी हाउस शुरू कर मवेशियों को वहां रखने की व्यवस्था करने की मांग की है।