36,577 जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए 18,32,013 लोगों तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश
“हर गांव-हर घर साइबर जागरूक” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने में मुंगेली पुलिस की अहम भूमिका
मुंगेली। आज के डिजिटल युग में मोबाइल और इंटरनेट जहां आमजन की दिनचर्या को सुगम बना रहे हैं, वहीं साइबर अपराध के नए-नए तौर-तरीके भी चुनौती बन रहे हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय द्वारा चलाए गए राज्यव्यापी “साइबर जागृति अभियान” के अंतर्गत जिला मुंगेली में 15 अगस्त से 02 अक्टूबर 2026 तक सात सप्ताह का सघन एवं व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया गया।
प्रदेश के 34 जिलों में मुंगेली ने हासिल किया 5वां स्थान
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के कुशल नेतृत्व और जिले की पुलिस टीम के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप मुंगेली जिले ने पूरे प्रदेश में अपनी मजबूत छाप छोड़ी है। छत्तीसगढ़ के सभी 34 जिलों में चलाए गए इस महाअभियान में जिला मुंगेली ने जागरूकता कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन एवं जन-सहभागिता के आधार पर प्रदेश में 5वां स्थान प्राप्त किया है।
एसएसपी भोजराम पटेल के मार्गदर्शन में मुंगेली पुलिस ने साइबर सुरक्षा को केवल किसी एक वर्ग तक सीमित न रखते हुए बच्चों, विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, किसानों, व्यापारियों, श्रमिकों, जनप्रतिनिधियों एवं आम नागरिकों तक पहुंचाया।
अभियान का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराध घटित होने के बाद की कार्रवाई के साथ-साथ अपराध होने से पूर्व ही नागरिकों को सतर्क और सुरक्षित बनाना रहा। पुलिस टीमों ने प्रत्यक्ष संवाद, जनचौपाल, शैक्षणिक संस्थानों, बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों, ग्राम पंचायतों तथा सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचकर आमजन को आवश्यक डिजिटल सावधानियों से अवगत कराया।
सात सप्ताह में अलग-अलग साइबर खतरों पर केंद्रित रहा अभियान
प्रथम सप्ताह – डिजिटल सुरक्षा की बुनियाद:
स्कूल एवं कॉलेजों में 20 कार्यक्रम आयोजित कर 1,420 विद्यार्थियों एवं नागरिकों को अनजान लिंक, संदिग्ध एप, कमजोर पासवर्ड, ओटीपी व पासवर्ड की गोपनीयता तथा सुरक्षित सोशल मीडिया उपयोग के संबंध में जागरूक किया गया।
द्वितीय सप्ताह – ऑनलाइन बैंकिंग एवं वित्तीय ठगी से बचाव:
बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों में 06 कार्यक्रमों के माध्यम से 2,138 लोगों को UPI फ्रॉड, फर्जी बैंक अधिकारी, QR कोड स्कैनिंग, OTP तथा वित्तीय जानकारी साझा करने के खतरों से आगाह किया गया।
तृतीय सप्ताह – डिजिटल अरेस्ट के खिलाफ जागरूकता:
‘डिजिटल अरेस्ट’ एवं फर्जी कॉल्स जैसे नए और गंभीर साइबर अपराधों को लेकर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। इस दौरान 91 कार्यक्रमों में 23,027 नागरिकों को फर्जी पुलिस, CBI अथवा ED अधिकारी बनकर की जाने वाली ठगी, वीडियो कॉल और फर्जी अरेस्ट वारंट/नोटिस से सावधान रहने की जानकारी दी गई।
चतुर्थ सप्ताह – मोबाइल एवं सोशल मीडिया सुरक्षा:
स्मार्टफोन प्राइवेसी, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, साइबर बुलिंग/उत्पीड़न तथा निजी तस्वीरों और व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग से बचाव के लिए 6,985 कार्यक्रम आयोजित कर 3,24,240 लोगों को जागरूक किया गया।
पंचम सप्ताह – युवाओं को जॉब फ्रॉड से बचाने पर जोर:
युवा वर्ग को फर्जी वर्क-फ्रॉम-होम, फर्जी भर्ती विज्ञापनों एवं फिशिंग लिंक से होने वाली ठगी से बचाने के लिए 4,612 कार्यक्रमों के जरिए 2,36,455 लोगों को जागरूक किया गया। पुलिस द्वारा किसी भी नौकरी के लिए अग्रिम राशि जमा न करने और कंपनी का सत्यापन करने की सलाह दी गई।
छठवां सप्ताह – व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा:
व्यक्तिगत फोटो, संवेदनशील दस्तावेज, लोकेशन आदि की सुरक्षा को लेकर 8,033 कार्यक्रम आयोजित कर 4,02,825 नागरिकों को जागरूक किया गया। इस दौरान गांव-गांव चौपाल लगाकर साइबर सुरक्षा की शपथ भी दिलाई गई।
सातवां सप्ताह – साइबर मुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प:
गांधी जयंती के अवसर पर ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में “साइबर मुक्त छत्तीसगढ़” के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाया गया। अंतिम सप्ताह में रिकॉर्ड 16,830 कार्यक्रमों के माध्यम से 8,41,908 लोगों को साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहने तथा समाज को जागरूक करने का संकल्प दिलाया गया।
36,577 कार्यक्रमों के जरिए 18,32,013 लोगों से सीधा संवाद
सात सप्ताह की अवधि में मुंगेली पुलिस द्वारा कुल 36,577 साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके जरिए 18,32,013 लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। यह अभियान केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि थाना, चौकी और बीट स्तर की टीमों ने घर-घर और गांव-गांव पहुंचकर लोगों को साइबर अपराध से बचाव के उपाय समझाए।
“हर गांव-हर घर साइबर जागरूक” अभियान में बीट पुलिस की सराहनीय भूमिका
मुंगेली पुलिस ने बीट प्रणाली को इस अभियान की मुख्य धुरी बनाया। बीट प्रभारियों एवं जवानों ने सीधे ग्रामीणों से संपर्क स्थापित किया। वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट से बचाव, महिलाओं को सोशल मीडिया प्राइवेसी, युवाओं को जॉब फ्रॉड तथा आम नागरिकों को बैंकिंग और UPI फ्रॉड से बचने की बुनियादी बातें समझाई गईं।
साथ ही किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN या पासवर्ड साझा न करने की हिदायत दी गई।
साइबर ठगी होने पर गोल्डन ऑवर बेहद महत्वपूर्ण
पुलिस ने आमजन से अपील की कि यदि किसी के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है, तो घबराने के बजाय तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
घटना के तुरंत बाद यानी गोल्डन ऑवर में सूचना देने से ठगी की गई राशि को बैंक खातों में होल्ड/फ्रीज कराने की संभावना सर्वाधिक रहती है।
एसएसपी भोजराम पटेल का संदेश—“जागरूकता ही साइबर सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार”
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने मुंगेली जिले द्वारा प्रदेश में 5वां स्थान प्राप्त करने पर पूरी पुलिस टीम एवं जिलेवासियों की सहभागिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के इस युग में थोड़ी-सी सावधानी बड़ी आर्थिक और मानसिक क्षति से बचा सकती है।
उन्होंने कहा कि अभियान की समाप्ति के बाद भी यह सतर्कता निरंतर बनी रहनी चाहिए। सभी नागरिक स्वयं सतर्क रहें, परिवार को सुरक्षित रखें और किसी भी संदेहास्पद कॉल, लिंक या प्रलोभन पर बिना पुष्टि के विश्वास न करें। साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल 1930 पर संपर्क करें।
साइबर जागृति अभियान के माध्यम से मुंगेली पुलिस ने न केवल साइबर अपराधों के प्रति आमजन को जागरूक किया, बल्कि डिजिटल सुरक्षा को लेकर जिले में व्यापक जनभागीदारी भी सुनिश्चित की। “हर गांव-हर घर साइबर जागरूक” का संदेश अब जिले के गांव-गांव और घर-घर तक पहुंच चुका है।