संत मलूकदासजी भगवान श्रीराम के थे अनन्य भक्त – केन्द्रीय मंत्री सिंधिया

संत मलूकदासजी की स्मृति में किया स्मारक डाक टिकट का विमोचन

अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

नई दिल्ली । डाक विभाग द्वारा जारी किया गया यह स्मारक डाक टिकट संत मलूकदासजी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाने का माध्यम है। संत मलूकदासजी की स्मृति में जारी यह डाक टिकट उनकी भक्ति , ज्ञान , करुणा और लोककल्याण की उस समृद्ध परंपरा को राष्ट्रीय स्मृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है , जिसने पीढ़ियों को जीवन का मार्ग दिखाया है।
उक्त बातें केन्द्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज संत मलूकदासजी ने आज मलूकपीठाधीश्वर श्री राजेन्द्रदास देवाचार्य जी महाराज के जन्मोत्सव (ऋषि पंचमी) के अवसर पर तालकटोरा स्टेडियम में भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा जारी श्री मलूकदासजी की पावन स्मृति में डाक टिकट का लोकार्पण करते हुये कही। इस अवसर पर श्रीराम कथा एवं संत समागम का भी शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर संत-महात्माओं , पूज्य संत शिरोमणियों , पूज्य स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्यजी महाराज , श्री मलूक पीठ सेवा संस्थान न्यास के पदाधिकारियों तथा देश के विभिन्न हिस्सों से आये श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुये केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि संतों की वाणी और उनका जीवन भारत की आत्मा को दिशा देने का कार्य करता रहा है। उन्होंने कहा कि यह विशेष संयोग है कि जिस संत का हृदय प्रभु श्रीराम की भक्ति में रमा रहा , उनकी स्मृति में स्मारक डाक टिकट का विमोचन श्रीराम कथा के शुभारंभ के अवसर पर हो रहा है। मंत्री सिंधिया ने कहा कि संत मलूकदासजी भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त थे , लेकिन उनकी रामभक्ति केवल पूजा और उपासना तक सीमित नहीं थी। उन्होंने प्रभु श्रीराम के चरित्र को अपने जीवन का दर्शन बनाया और उसे जन-जन तक पहुंचाया। श्रीराम को उन्होंने कर्तव्य , त्याग , सत्य , करुणा , न्याय और लोककल्याण के प्रतीक के रूप में देखा।उन्होंने संत मलूकदास जी की प्रसिद्ध पंक्तियों – मलूका ऐसी राम की , कृपा भई है मोय। सकल जगत अपना भया , बैरी रहा ना कोय॥ का उल्लेख करते हुये कहा कि इन पंक्तियों में संत की उस आध्यात्मिक अवस्था का दर्शन होता है , जहां राम की कृपा से अपना और पराया का भेद समाप्त हो जाता है और पूरा संसार अपना लगने लगता है। उन्होंने कहा कि राम की कृपा जब होती है तो परिवार बड़ा होता जाता है , हृदय में वैर समाप्त होता है और सेवा ही साधना बन जाती है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारत जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है उसके पीछे केवल आर्थिक विकास नहीं , बल्कि गहरा सांस्कृतिक आत्मविश्वास भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर , काशी विश्वनाथ धाम , महाकाल लोक तथा देश की अनेक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और पुनर्जीवन का उल्लेख करते हुये कहा कि भारत के लिये विकास और संस्कृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। भारत आधुनिक भी हो सकता है और अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ भी। तकनीक में अग्रणी बनने के साथ अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखना ही भारत की विशिष्ट पहचान है। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि भारत विकसित भारत 2047 के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है , लेकिन विकास तभी पूर्ण होगा जब उसके केंद्र में मनुष्य होगा। देश की प्रगति में करुणा , अर्थव्यवस्था में अवसर, तकनीक का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता , शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण और समाज के कल्याण के लिये शक्ति का उपयोग ही विकास को सार्थक बनाता है। भारत को संतोष , समता और आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाने वाले श्री मलूकदासजी पर डाक टिकट जारी करना केवल एक सम्मान नहीं , बल्कि भारत की संत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को डाक के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का संकल्प है। डाक टिकट भारत की आत्मा के दस्तावेज हैं। वहीं मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज ने इस अवसर पर भारत सरकार और डाक विभाग का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि संत मलूकदास जी महाराज का जीवन सामाजिक समरसता और मानव कल्याण का प्रतीक है और यह डाक टिकट उनके संदेश को घर-घर तक ले जायेगा।

Bhaskar Path

The News Related To The News Engaged In The https://bhaskarpath.com Web Portal Is Related To The News Correspondents The Editor Does Not Necessarily Agree With These Reports The Correspondent Himself Will Be Responsible For The News.

Latest from Blog

error: Content is protected !!