रायपुर /मुंगेली । आदर्श ग्राम पंचायत कुटेश्वर, विकासखंड आरंग, जिला रायपुर में 26 अगस्त 2026 को स्वर्गीय देवदास बंजारे स्मृति राज्य स्तरीय पंथी नृत्य महोत्सव एवं सतनाम संकीर्तन कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन समस्त ग्रामवासियों एवं दिनेश जांगड़े उपकार पंथी लोक नृत्य कल्याण सेवा समिति कुटेश्वर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के मंत्री गुरु खुशवंत साहेब रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. राधेश्याम बारले ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में स्वर सम्राट डॉ. गोरेलाल बर्मन, प्रख्यात गायक राजेंद्र रंगीला, तारा कुलकर्णी, चंदन बांधे सहित अनेक जाने-माने कलाकार एवं पंथी नृत्य से जुड़े कलाकार उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय पंथी कलाकार गौकरण बघेल, अमोल दास टंडन, रामप्रसाद मिर्चें, डॉ. सीएल रात्रे, दीनदयाल कोसले सहित बड़ी संख्या में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में समां बांधा। मुंगेली जिले से भी जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की। इनमें राजेंद्र टंडन पूर्व सरपंच, रैश कुमार दिवाकर सरपंच, रामकुमार मोहले सरपंच, धीर सिंह बंजारे पार्षद, जितेंद्र दिवाकर शिक्षक तथा राजेंद्र जोशी शिक्षक सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान लक्ष्मीकांत जड़ेजा, अध्यक्ष लोक सांस्कृतिक खेल एवं मानव कल्याण समिति, पंथी पार्टी भटगांव, जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़ सहित सभी कलाकारों को स्मृति चिह्न, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र एवं गमछा भेंटकर सम्मानित किया गया। आयोजन समिति एवं ग्रामवासियों ने कलाकारों के योगदान की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।
पंथी नृत्य के क्षेत्र में लक्ष्मीकांत जड़ेजा की विशेष पहचान
मुंगेली जिले के भटगांव निवासी लक्ष्मीकांत जड़ेजा पंथी नृत्य एवं लोक संस्कृति के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्हें अब तक 5 बार राज्य स्तरीय पंथी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें लगभग 300 से अधिक स्थानीय एवं सामाजिक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
लक्ष्मीकांत जड़ेजा ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पंथी कला एवं संस्कृति को देश के विभिन्न राज्यों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कई राज्यों में पंथी नृत्य की प्रस्तुतियां देकर मुंगेली जिले का नाम गौरवान्वित किया है। उनकी कला के प्रति समर्पण और निरंतर सक्रियता के चलते उन्हें लोक संस्कृति के क्षेत्र में विशेष पहचान मिली है।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने कहा कि पंथी नृत्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। आयोजन के दौरान कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे।